आईजीआरएस में फर्जी निस्तारण का आरोपः पहले दिया संस्तुति, फिर पलट दिया रिपोर्ट

पूर्व विधायक संजय प्रताप ने किया मामले की जांच की मांग आयुष विभाग की कार्यशैली पर मनोज सिंह ने उठाये सवाल

बस्ती। आयुष विभाग का विवाद अब सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल खड़ा कर रहा है। मानपुर बाबू निवासी मनोज सिंह ने आरोप लगाया है कि क्षेत्रीय आयुष अधिकारी डॉ. जगदीश यादव और आईजीआरएस पटल पर तैनात कर्मचारी विकास सिंह ने पैसे लेकर न केवल भ्रामक रिपोर्ट तैयार की, बल्कि पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बना दिया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन अधिकारियों ने खुद मौके का सर्वे कर प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन को उपयुक्त बताते हुए संस्तुति दी थी, वही अब अपनी ही रिपोर्ट से पलट गए। आखिर ऐसा क्या हुआ कि “सब कुछ ठीक” अचानक “सब कुछ गलत” हो गया? यह यू-टर्न महज लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित खेल की ओर इशारा करता है।

आरोप है कि भानपुर तहसील के ग्रामसभा लोढ़वा, नथवापुर में भूमि आवंटन और विभागीय मंजूरी के बावजूद, आईजीआरएस पर शिकायत आते ही बिना स्थलीय निरीक्षण की फाइल निपटा दी गई। इससे साफ संकेत मिलता है कि कागजों में ही पूरा खेल कर दिया गया और जमीनी सच्चाई को दरकिनार कर दिया गया। मामले ने तूल पकड़ लिया है।

इस सम्बन्ध में रुधौली के पूर्व विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

मनोज सिंह ने दो टूक कहा है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी अपनी जिम्मेदारी भूलकर योजनाओं को “कमाई का जरिया” बना रहे हैं, जिससे सरकार की मंशा और जनता दोनों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। अब यह मामला प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा बन चुका है, क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर फाइलों के नीचे दबाकर मामला ठंडा कर दिया जाएगा, यही सबसे बड़ा सवाल है।

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