डॉ. वी. के. वर्मा आयुष चिकित्साधिकारी, जिला चिकित्सालय बस्ती

मुक्तक समर्पित है

1. गुरु का होता ऊंचा नाम,

शिक्षा देता है निष्काम ।

गुरु वशिष्ठ की धरती को,

करता बारंबार प्रणाम ।

2. सच्चाई का पथ दिखलाया,

मानवता का पाठ पढ़ाया ।

गुरु वशिष्ठ ने मनोयोग से,

श्री राम को राम बनाया ।

 

3. हरी-भरी कैसी फुलवारी,

तीन लोक से लगती प्यारी ।

हर कोई कहता है “वर्मा”,

गुरु वशिष्ठ की महिमा न्यारी ।

 

4. गुरु शिष्य को देता ज्ञान,

गुरु होता है परम महान ।

गुरु कृपा से ही होता है,

वर्मा जड़ता का अवसान ।

 

5. जीवन की बगिया महाकाओ,

अंधकार को दूर भगाओ ।

बढ़नी की पावन धरती पर,

गुरु वशिष्ठ की महिमा गाओ ।

है सौभाग्य कि इसी धरा पर मैंने जन्म लिया है,

और गुरु से प्राइमरी तक शिक्षा प्राप्त किया है ।

गुरु वशिष्ठ की अनुकम्पा से मैं कितना बड़भागी,

इस धरती पर ज्ञान का अमृत आठो याम पिया है ।

1)बढ़नी की धरती हरषाई,

चहक उठी मन की अमराई ।

शिक्षा मैंने लिया जहाँ पर,

वहीं राम ने शिक्षा पाई ।

2)स्वामी राम भद्राचार्य जी आये,

गुरु वशिष्ठ की कथा सुनाये ।

जीवन की पावन बगिया में,

आज खुशी का फूल खिलाये ।

3)जीवन कितना सरल हो गया,

जटिल प्रश्न भी सरल हो गया ।

इस धरती पर पैदा होना,

‘वर्मा’ मेरा सफल हो गया ।

4)आयेगा आँखों में नूर,

भक्ति करो प्रभु की भरपूर ।

मुनि वशिष्ठ की कथा सुने जो,

उसका दुःख हो जाये दूर ।

5)जिसके शिष्य प्रभु श्री राम,

ऐसे गुरु को करो प्रणाम ।

है सौभाग्य कि आज हो गया,

गॉव हमारा तीरथ धाम ।

डॉ. वी. के. वर्मा आयुष चिकित्साधिकारी,

जिला चिकित्सालय बस्ती

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