विद्या भारती का लक्ष्य संस्कारयुक्त एवं राष्ट्रनिष्ठ पीढ़ी का निर्माण : डॉ. सौरभ मालवीय

बस्ती। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान भारतीय संस्कृति, संस्कार, राष्ट्रीयता एवं आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के समन्वय से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शिक्षा को केवल परीक्षा एवं रोजगार तक सीमित न रखते हुए उसे संस्कार, चरित्र निर्माण, सामाजिक समरसता, राष्ट्रभक्ति एवं राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया गया है।

उक्त बातें विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय जी ने सरस्वती विद्या मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रामबाग-बस्ती में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहीं। उन्होंने पत्रकार बंधुओं से संवाद करते हुए विद्या भारती के शैक्षिक कार्यों, गोरक्ष प्रान्त की उपलब्धियों तथा आगामी कार्यक्रमों की कार्ययोजना की विस्तार से जानकारी दी।

डॉ. सौरभ मालवीय जी ने कहा कि विद्या भारती का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को विषयों का ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें ज्ञानवान, चरित्रवान, संस्कारवान, राष्ट्रभक्त एवं समाज के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाना है। आधुनिक तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बीच शिक्षा में नैतिकता, संस्कार एवं मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखना आवश्यक है। इसी दृष्टि से विद्या भारती के विद्यालयों में आधुनिक तकनीक, डिजिटल शिक्षा, अटल टिंकरिंग लैब, रोबोटिक्स, कोडिंग एवं नवाचार आधारित गतिविधियों को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने विद्या भारती गोरक्ष प्रान्त के विद्यालयों में शिक्षा के साथ संस्कार, विज्ञान, खेल, संस्कृति, सेवा, सामाजिक समरसता, बालिका शिक्षा एवं तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा के विकास के साथ समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने के अवसर दिए जा रहे हैं।

प्रान्त के विभिन्न विद्यालयों के पूर्व छात्र प्रशासनिक सेवा, चिकित्सा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, आईटी, शिक्षा, व्यवसाय सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते हुए राष्ट्र एवं समाज की सेवा कर रहे हैं। यह विद्या भारती की संस्कारयुक्त शिक्षा की प्रभावशीलता का प्रमाण है।

पत्रकार वार्ता में आगामी प्रमुख कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया गया कि संत रविदास जी के 650वीं जयंती वर्ष को विशेष रूप से मनाया जाएगा। उनके जीवन, दर्शन, सामाजिक समरसता, समानता एवं मानवता के संदेश को विद्यार्थियों और समाज तक पहुंचाने के लिए वर्षभर विभिन्न शैक्षिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

विद्यालयों में संत रविदास जी के जीवन एवं विचारों पर आधारित व्याख्यान, विचार गोष्ठियां, निबंध, चित्रकला, सांस्कृतिक एवं अन्य रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके योगदान से परिचित कराया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक समरसता एवं समानता का संदेश समाज तक पहुंचाया जाएगा।

इसी क्रम में वन्दे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ को भी व्यापक रूप से मनाने की कार्ययोजना बनाई गई है। विद्यालयों एवं समाज में सामूहिक वन्दे मातरम् गान, गायन प्रतियोगिता, पेंटिंग प्रतियोगिता, निबंध लेखन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों एवं समाज में वन्दे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व, राष्ट्रीय चेतना एवं देशभक्ति के

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