आदि शंकराचार्य प्राकट्य दिवस पर “पहल” संस्था का भव्य आयोजन, 1000 महिलाओं को मिली सिलाई मशीनें

बस्ती में महिला सशक्तिकरण की बड़ी पहल, 1000 महिलाओं को वितरित हुई सिलाई मशीनें,15 जून से हर महिला को मिलेगा ₹1000 प्रतिमाह, 25 मई को 2000 महिलाएं बनाएंगी वर्ल्ड रिकॉर्ड

बस्ती। जगतगुरु आदि शंकराचार्य के प्राकट्य दिवस के पावन अवसर पर “पहल” संस्था द्वारा महिला सशक्तिकरण को समर्पित एक भव्य एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली, जिससे पूरा कार्यक्रम स्थल उत्साह और ऊर्जा से सराबोर नजर आया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संस्था से जुड़ी 1000 महिलाओं को सिलाई मशीनों का वितरण रहा। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। सिलाई मशीन मिलने से अब ये महिलाएं अपने घर पर ही रोजगार शुरू कर सकेंगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे अपने परिवार की आय में सहयोग दे सकेंगी।

इस अवसर पर मशहूर उद्योगपति रश्मि चतुर्वेदी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। उन्होंने अपने संबोधन में “पहल” संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य करती है। उन्होंने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर बनना ही सशक्तिकरण की सबसे बड़ी पहचान है, और इस दिशा में उठाया गया हर कदम समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

कार्यक्रम के दौरान “पहल” संस्था के संस्थापक मनीष मिश्रा ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कर सभी को चौंका दिया। उन्होंने बताया कि संस्था से जुड़ी प्रत्येक महिला के बैंक खाते में 15 जून से प्रतिमाह ₹1000 की धनराशि भेजी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे अपनी आवश्यकताओं को स्वयं पूरा कर सकें और किसी पर निर्भर न रहें।

मनीष मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि “पहल” संस्था का लक्ष्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाना है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सशक्त होंगी, तभी समाज और देश का समग्र विकास संभव होगा।

इसके साथ ही उन्होंने एक और ऐतिहासिक घोषणा करते हुए बताया कि 25 मई को बस्ती एक नई उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। इस दिन एक साथ 2000 महिलाएं “राम जी का सोहर” गाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने का प्रयास करेंगी। इस आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

यह आयोजन न केवल महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बना, बल्कि सांस्कृतिक गौरव को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास है। “राम जी का सोहर” जैसे पारंपरिक लोकगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की यह पहल बस्ती के लिए गर्व का विषय बन सकती है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी महिलाओं में उत्साह और आत्मविश्वास साफ नजर आया। “पहल” संस्था द्वारा उठाए गए इन कदमों ने यह साबित कर दिया कि सही दिशा में किए गए प्रयास समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। यह आयोजन नारी शक्ति, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक समृद्धि का एक सशक्त संदेश देकर संपन्न हुआ।

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