तकनीक के दौर में संतुलन जरूरी, स्क्रीन टाइम पर रखें नियंत्रण-डीआईजी

सेंट फ्रांसिस स्कूल के प्रथम वार्षिकोत्सव में बच्चों ने बिखेरा प्रतिभा का रंग

बस्ती। डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों में मोबाइल और स्क्रीन के बढ़ते उपयोग को लेकर अभिभावकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह बात उप पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) बस्ती रेंज संजीव त्यागी ने कही। वे सेंट फ्रांसिस स्कूल के प्रथम वार्षिकोत्सव समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

अपने संबोधन में डीआईजी ने कहा कि वर्तमान समय तकनीकी क्रांति का दौर है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सीखने की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाया है। ऐसे में बच्चों को तकनीक से दूर रखना संभव भी नहीं है और न ही उचित है। लेकिन तकनीक का अत्यधिक उपयोग बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

उन्होंने कहा कि आज कई छात्र अपना अधिकतर समय मोबाइल फोन, वीडियो गेम और सोशल मीडिया पर व्यतीत कर रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई, एकाग्रता और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर निगरानी रखें और उन्हें संतुलित दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित करें। खेलकूद, पुस्तक पठन, पारिवारिक संवाद और सांस्कृतिक गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

डीआईजी ने कहा कि तकनीक का उपयोग ज्ञानवर्धन और रचनात्मक कार्यों के लिए किया जाए, न कि केवल मनोरंजन और समय व्यर्थ करने के लिए। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों के लिए मोबाइल उपयोग की समय-सीमा निर्धारित करें तथा स्वयं भी अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करें।

उन्होंने विद्यालय प्रबंधन की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का समावेश भी आवश्यक है। इस दिशा में विद्यालय के संस्थापक सानू एंटोनी और निदेशक सुष्मिता सानू का प्रयास सराहनीय है।

कार्यक्रम में विद्यालय के विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। देशभक्ति गीत, नृत्य-नाटिका, समूह गान और सामाजिक संदेश आधारित नाटकों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुति और प्रभावशाली मंच संचालन ने विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता और प्रशिक्षण को प्रदर्शित किया।

समारोह में विभिन्न कक्षाओं के मेधावी छात्रों को सम्मानित भी किया गया। डीआईजी ने उन्हें पुरस्कार प्रदान करते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। निरंतर परिश्रम, अनुशासन और सकारात्मक सोच ही लक्ष्य प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

निदेशक सुष्मिता सानू ने मुख्य अतिथि सहित सभी विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल परीक्षा परिणामों में उत्कृष्टता प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देना है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ खेल, संगीत, नृत्य और नैतिक शिक्षा को भी समान महत्व दिया जाता है।

संस्थापक सानू एंटोनी ने कहा कि सेंट फ्रांसिस स्कूल की स्थापना का उद्देश्य बस्ती जनपद में गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग और विश्वास से ही विद्यालय निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

विद्यालय की प्रधानाचार्य सोनिया थॉमस ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने कहा कि विद्यालय बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ते हुए उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानाचार्य ने यह भी कहा कि तकनीक का संतुलित उपयोग और संस्कारयुक्त शिक्षा का समन्वय ही विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।

कार्यक्रम में अभिभावकों की भारी उपस्थिति रही। बच्चों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। विद्यालय परिसर रंग-बिरंगी सजावट और उत्साहपूर्ण वातावरण से सराबोर नजर आया।

समारोह के अंत में निदेशक सुष्मिता सानू ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सेंट फ्रांसिस स्कूल भविष्य में भी शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेगा तथा बच्चों को एक सुरक्षित और प्रेरणादायक वातावरण प्रदान करता रहेगा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ

इस अवसर पर सभी सभी शिक्षक शिक्षिकाएँ मौजूद रही।

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