
पैडा धाम बना श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र, हजारों भक्त हर रविवार लगाते हैं अर्जी, दूर-दूर से पहुंच रहे हैं श्रद्धालु
बस्ती जनपद में स्थित पैडा धाम आज पूरे पूर्वांचल का एक प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है। श्रद्धा, विश्वास और चमत्कार की कहानियों से जुड़ा यह स्थान बस्ती मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर बस्ती–रुधौली मार्ग पर स्थित पैडा गांव में है। जहां हर रविवार को एक विशेष दरबार लगता है और हजारों की संख्या में भक्त अपनी अर्जी लेकर बाबा के चरणों में पहुंचते हैं। यही कारण है कि पैडा धाम अब सिर्फ एक गांव का धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और पड़ोसी देश नेपाल के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण आस्था केंद्र बन गया है।
पैडा धाम के प्रमुख सेवक गोविंद जी महाराज बताते हैं कि यहां बाल जी सरकार अर्थात हनुमान जी की विशेष कृपा मानी जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां आने वाले भक्त की अर्जी यदि स्वीकार हो जाए तो उसकी हर समस्या दूर हो जाती है—चाहे वह बीमारी हो, मानसिक तनाव हो, पारिवारिक परेशानी हो या कोई अन्य दुख। यहां आने वाले भक्त चिट्ठी के रूप में अपनी अर्जी बाबा के चरणों में अर्पित करते हैं और बताया जाता है कि बाबा स्वयं चमत्कारी रूप से भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं।
उन्होंने कहा, “हम तो बस सेवक हैं, यहां सब कुछ बाबा की कृपा से होता है। जिन लोगों की अर्जी स्वीकार होती है, वे पुनः यहां आकर धन्यवाद ज्ञापन करते हैं।”
पैडा धाम में बस्ती जिले के अलावा गोरखपुर, खलीलाबाद, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, अम्बेडकरनगर सहित पूर्वांचल के अनेक जिलों से भक्त हर रविवार पहुंचते हैं। इसके अलावा नेपाल के कई इलाकों से भी श्रद्धालु यहां आस्था के साथ आते हैं। कई भक्त तो इतने प्रभावित होते हैं कि हर महीने और कई लोग हर हफ्ते यहां दर्शन करने आते हैं। दूर-दराज से लोग बस, कार, बाइक और अन्य साधनों से यहां पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां की शांत और दिव्य ऊर्जा मन को सुकून देती है। बहुत से लोगों ने दावा किया है कि यहां प्रार्थना करने के बाद उनकी बीमारियां ठीक हो गईं, पारिवारिक विवाद समाप्त हो गए, कारोबार में उन्नति होने लगी और जीवन में सुख-शांति आई।
पैडा धाम की एक बड़ी विशेषता यह है कि यहां सिर्फ हिंदू समुदाय ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज सहित अन्य धर्मों के लोग भी बड़ी श्रद्धा के साथ आते हैं। बाबा के दरबार में कोई भेदभाव नहीं है—सभी लोग एक साथ लाइन में लगकर अर्जी अर्पित करते हैं। यह बात इस धाम को धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव का भी केंद्र बनाती है।
स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि कई मुस्लिम परिवार वर्षों से यहां श्रद्धा के साथ आते हैं और उनकी अर्जी भी स्वीकार होती है। लोगों का कहना है कि यहां धर्म नहीं, बल्कि विश्वास की भाषा बोली जाती है।
भले ही इस धाम का इतिहास बहुत पुराना नहीं माना जाता, फिर भी यहां घटित चमत्कारिक घटनाओं और लोगों के अनुभवों ने इसे बेहद लोकप्रिय बना दिया है। धीरे-धीरे यहां का नाम गांव से निकलकर पूरे जिले और अब पूरे पूर्वांचल में फैल चुका है। सोशल मीडिया और मौखिक प्रचार से यह धाम आज हजारों श्रद्धालुओं के हृदय में एक विशेष स्थान बना चुका है।
धाम की व्यवस्था स्थानीय लोगों और सेवकों द्वारा संभाली जाती है। यहां भोजन-प्रसाद की व्यवस्था, बैठने के लिए स्थान और साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। Sundays (रविवार) को यहां मेले जैसा माहौल रहता है। अलग-अलग जिलों से बसें और निजी वाहन भरकर भक्त यहां पहुंचते हैं।
यहां एक अनोखी परंपरा है जिस श्रद्धालु की अर्जी बाबा स्वीकार कर लेते हैं, वह वापस यहां आता है और बाबा की कृपा के लिए आभार प्रकट करता है। बहुत से लोग यहां प्रसादी चढ़ाते हैं, भंडारा करवाते हैं या मंदिर परिसर में सेवा करते हैं।
गोविंद जी महाराज के अनुसार, “हमने कई ऐसे लोगों को देखा है जो पहले कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे थे, लेकिन बाबा की कृपा से आज वे सुखी, स्वस्थ और सफल जीवन जी रहे हैं।”
भक्तों की बढ़ती संख्या से पैडा गांव की अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव आया है। यहां चाय, नाश्ता, प्रसाद, फूल-माला, पूजा सामग्री और वाहन पार्किंग जैसे छोटे व्यवसाय तेजी से बढ़ रहे हैं। स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है और गांव की पहचान भी राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही है।
आज पैडा धाम सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विश्वास, सामाजिक एकता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक बन चुका है। यहां की लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि सच्ची आस्था शब्दों से नहीं बल्कि हृदय से व्यक्त होती है। जो भी भक्त यहां आता है, वह एक नई आशा, नया विश्वास और नई ऊर्जा लेकर लौटता है।
पैडा धाम हर उस व्यक्ति के लिए आस्था का केंद्र है जो अपने जीवन में शांति, समाधान और आध्यात्मिक संतोष की तलाश में है। बाबा की कृपा और भक्तों की श्रद्धा ने इसे एक ऐसा स्थल बना दिया है जहां धर्म, जाति और सीमाओं से परे केवल एक ही आवाज सुनाई देती है—”जय बाल जी सरकार”।





