दलित समाज की बेटी का कन्या पूजन कर मनीष मिश्रा ने दिया सामाजिक समरसता का संदेश, बोले— बस्ती को जातिवाद से मुक्त बनाना मेरा संकल्प

शतचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ हवन-पूजन, मनीष मिश्रा ने किया माता का श्रृंगार

बस्ती में आयोजित भव्य शतचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन सोमवार को सामाजिक समरसता, सनातन संस्कृति और मानव सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। महायज्ञ के मुख्य यजमान एवं पहल संस्था के संस्थापक मनीष मिश्रा ने दलित समाज से आने वाले सुनील जी की कन्या का विधि-विधान से पूजन कर समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव को समाप्त करने का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने बस्ती को जाति-पाति और ऊँच-नीच के भेदभाव से मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया।

कन्या पूजन के दौरान मनीष मिश्रा ने कहा, “मेरा संकल्प है कि बस्ती में जाति-पाति का कोई स्थान न रहे। मैं बस्ती को जातिवाद से मुक्त बनाना चाहता हूँ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि देश में चार ही जातियाँ हैं— गरीब, किसान, महिला और युवा। मेरे लिए भी यही चार जातियाँ हैं। इनके अतिरिक्त मैं किसी जातिगत भेदभाव में विश्वास नहीं करता। बस्ती का हर व्यक्ति मेरा अपना है और हर परिवार की सुख-समृद्धि मेरी जिम्मेदारी है।”

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सभी में एक ही परमात्मा का दर्शन करना सिखाता है। कन्या पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मातृशक्ति के प्रति सम्मान और सामाजिक समानता का प्रतीक भी है। समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब जातिगत भेदभाव समाप्त हो और प्रत्येक व्यक्ति को समान आदर एवं अवसर मिले।

इससे पहले, एक दिन पूर्व भव्य कलश यात्रा के साथ आरंभ हुए शतचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन दिल्ली से आए मुख्य पुरोहित अजय पांडे के नेतृत्व में विद्वान ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन, यज्ञ और हवन संपन्न कराया। इस दौरान मुख्य यजमान मनीष मिश्रा ने माँ भगवती का विधि-विधान से श्रृंगार कर आरती एवं पूजन किया तथा समस्त बस्तीवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की।

महायज्ञ में धार्मिक अनुष्ठानों के पश्चात मनीष मिश्रा ने बस्ती के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों का भ्रमण किया। उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर स्थापित माँ दुर्गा की प्रतिमाओं के दर्शन किए, पूजा-अर्चना की तथा स्थानीय श्रद्धालुओं और नागरिकों से मुलाकात की।

इस दौरान उन्होंने लोगों की व्यक्तिगत एवं पारिवारिक समस्याओं को भी गंभीरता से सुना। एक बुजुर्ग व्यक्ति ने अपनी बेटी के विवाह में आर्थिक कठिनाइयों की बात रखी, जिस पर मनीष मिश्रा ने बेटी के विवाह के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का वादा किया।

इसी क्रम में एक जरूरतमंद महिला ने अपनी बीमारी और इलाज में आ रही कठिनाइयों से अवगत कराया। मनीष मिश्रा ने महिला को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली भेजकर उसका इलाज कराने का आश्वासन दिया।

मनीष मिश्रा ने कहा, “माँ भगवती की आराधना तभी सार्थक है, जब हम उनके प्रत्येक स्वरूप का सम्मान करें और समाज के जरूरतमंद लोगों के दुख-दर्द में सहभागी बनें। किसी गरीब की बेटी का विवाह हो, किसी बीमार को इलाज की आवश्यकता हो या किसी परिवार के सामने कोई संकट हो, मैं अपनी सामर्थ्य के अनुसार हरसंभव सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहूँगा।”

उन्होंने आगे कहा कि बस्ती में सामाजिक समरसता, सेवा और सनातन संस्कारों को मजबूत बनाना ही उनका उद्देश्य है। बस्ती का प्रत्येक परिवार उनका अपना परिवार है और किसी भी व्यक्ति के सम्मान एवं अधिकारों के बीच जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति को बाधा नहीं बनने देना चाहिए।

गौरतलब है कि रविवार को भव्य कलश यात्रा के साथ बस्ती में शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ हुआ था। दिल्ली से आए मुख्य पुरोहित अजय पांडे एवं उनके साथ उपस्थित विद्वान पुरोहितों के नेतृत्व में महायज्ञ के धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं। मनीष मिश्रा इस महायज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में सम्मिलित हैं।

जातिवाद के विरुद्ध सामाजिक समरसता का संदेश, सनातन परंपराओं के प्रति आस्था और जरूरतमंदों की सहायता के संकल्प के साथ शतचंडी महायज्ञ का दूसरा दिन संपन्न हुआ।

Related Articles

Back to top button