
बिना तलाक दूसरी शादी रचाने पहुँची नंदनी, नगर पुलिस और वर पक्ष की तत्परता से रुकी शादी, हंगामा मचा
बस्ती जनपद में उस समय अफरा-तफरी और हंगामा मच गया जब गुजरात की रेशमा प्रकरण की तर्ज पर एक और मामला सामने आया। बताया जा रहा है कि कलवारी थाना क्षेत्र की महिला नंदनी, अपनी आठ साल पुरानी शादी के बंधन को कानूनी रूप से खत्म किए बिना, नगर थाना क्षेत्र स्थित दुर्गा मंदिर में दूसरी शादी रचाने पहुँच गई। मामले की जानकारी मिलते ही न केवल परिजन बल्कि पुलिस को भी दखल देना पड़ा और विवाह स्थल पर तनाव का माहौल बन गया।सूत्रों के अनुसार, नंदनी की शादी करीब आठ वर्ष पूर्व धनघटा थाना क्षेत्र के नतही नगुई गाँव निवासी शीला देवी के बेटे अंकुर से हुई थी। शादी के बाद कुछ वर्षों तक सब सामान्य रहा, लेकिन पिछले कुछ समय से नंदनी अपने ससुराल आने से लगातार बचती रही। परिजनों ने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन नंदनी ने ससुराल जाने से साफ इंकार कर दिया। परिजन इस बदलाव को समझ नहीं पा रहे थे, लेकिन कुछ दिनों से उन्हें संदेह था कि वह किसी और व्यक्ति के संपर्क में है।इसी बीच, मंगलवार को ससुराल पक्ष को जानकारी मिली कि नंदनी चोरी-छिपे नगर थाना क्षेत्र के दुर्गा मंदिर में दूसरी शादी करने जा रही है। सूचना मिलते ही ससुराल वाले तत्काल मौके पर पहुंच गए। विवाह स्थल पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और वहाँ जोरदार हंगामा शुरू हो गया। जैसे ही यह बात फैली कि महिला बिना तलाक दूसरी शादी कर रही है, स्थानीय लोगों की भीड़ भी मंदिर परिसर में जमा हो गई।घटना की सूचना मिलते ही नगर थानाध्यक्ष विश्वमोहन राय पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पहले भीड़ को शांत किया और फिर दोनों पक्षों को अलग-अलग बैठाकर उनकी बातें सुनीं। पूछताछ में यह स्पष्ट हो गया कि नंदनी ने अपने पहले पति अंकुर से कानूनी रूप से तलाक नहीं लिया था, जिसके बावजूद वह किसी अन्य व्यक्ति के साथ विवाह करने जा रही थी।थानाध्यक्ष विश्वमोहन राय ने नंदनी, उसके परिजनों और ससुराल पक्ष से विस्तार से बातचीत की। पुलिस ने महिला को यह समझाया कि हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार, पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त किए बिना दूसरी शादी करना अपराध है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ससुराल पक्ष ने भी अपनी आपत्ति स्पष्ट रूप से रखी कि बिना तलाक के दूसरी शादी न केवल अवैध है, बल्कि सामाजिक रूप से भी अस्वीकार्य है।काफी मशक्कत और समझाने-बुझाने के बाद दोनों पक्षों में बातचीत शुरू हुई। पुलिस की मध्यस्थता से लंबी चर्चा के बाद, आखिरकार दोनों परिवार आपसी सहमति से अलग होने को तैयार हो गए। दोनों ने यह भी स्वीकार किया कि उनके बीच संबंध अब पहले जैसे नहीं रहे और विवाद लगातार बढ़ता जा रहा था। इसलिए, शांतिपूर्ण समाधान के तहत दोनों ने लिखित रूप में आपसी सुलह समझौता किया कि वे कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अलग हो जाएंगे तथा भविष्य में कोई पक्ष एक-दूसरे के जीवन में हस्तक्षेप नहीं करेगा।थानाध्यक्ष विश्वमोहन राय ने बताया कि पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी सामाजिक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। यदि समय रहते पुलिस न पहुँचती, तो मामला बड़ा विवाद बन सकता था। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मामलों में जल्दबाज़ी या ग़लत फ़ैसले अक्सर विवाद और अपराध को जन्म देते हैं, इसलिए लोगों को कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।जिला मुख्यालय में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों को लेकर लोगों में चर्चा तेज है। हाल ही में गुजरात निवासी रेशमा ने भी अपने पति पर नाम बदलकर दूसरी शादी करने का आरोप लगाकर हंगामा किया था। अब नंदनी मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या लोग विवाह जैसे महत्वपूर्ण रिश्ते को हल्के में लेने लगे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया और बदलती जीवनशैली के कारण इस तरह के मामलों में वृद्धि हो रही है। कई बार लोग भावनाओं में बहकर या गलत रिश्तों के चक्कर में कानून को दरकिनार कर फैसले लेने लगते हैं, जिसका नुकसान बाद में उन्हें ही उठाना पड़ता है। दूसरी ओर, पुलिस का मानना है कि यदि किसी रिश्ते में समस्या है तो लोग न्यायालय की प्रक्रिया से गुजरकर ही निर्णय लें, क्योंकि कानून को नजरअंदाज करने से सामाजिक तनाव और कानूनी विवाद दोनों बढ़ते हैं।मंदिर में रुकी यह शादी देर शाम तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि, पुलिस और दोनों परिवारों की समझदारी से मामले को शांतिपूर्वक निपटा लिया गया, जिससे बड़ा विवाद टल गया।फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने घर चले गए हैं और पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी तरह की अवैध शादी या कानून विरोधी कदम पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।





